अध्याय 77

सेथ ने ठंडी-सी हँसी में नाक सिकोड़ी। “मैंने ऐसा कब कहा?”

एबिगेल जड़-सी रह गई। “पर कल तो…”

“वो क्या सोचती है, उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।”

एबिगेल पूरी तरह हक्की-बक्की रह गई। उसने होंठ काटा और पूछा, “तुम्हारा मतलब क्या है?”

सेथ ने ज़रा-सा मुड़कर उसकी ओर देखा; नज़र शांत थी, मगर पढ़ी नहीं जा सकती थी...

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